श्रीकांत बोल्ला: बाधाओं को पार कर उद्यमिता से समाज परिवर्तन की कहानी || Gyan Se Prakash ज्ञान से प्रकाश - एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर
श्रीकांत बोल्ला: बाधाओं को पार कर उद्यमिता से समाज परिवर्तन की कहानी
"अगर दुनिया कहती है कि आप कुछ नहीं कर सकते, तो इसका मतलब है कि आपको वह काम करके दिखाना है।" यह विचार है श्रीकांत बोल्ला का, जो जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद आज एक सफल उद्यमी हैं और हज़ारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।
संघर्ष: समाज की संकीर्ण सोच से मुकाबला
श्रीकांत का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जन्म के समय, उनके माता-पिता को पड़ोसियों ने सलाह दी थी कि "यह बच्चा किसी काम का नहीं है, इसे त्याग दो।" लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें शिक्षित करने का निर्णय लिया। स्कूल में उन्हें आखिरी बेंच पर बिठाया जाता था, और 10वीं के बाद उन्हें विज्ञान (Science) पढ़ने से सिर्फ इसलिए रोका गया क्योंकि वे देख नहीं सकते थे। उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी, जीत हासिल की और बाद में अमेरिका के प्रतिष्ठित MIT से स्नातक करने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय दृष्टिबाधित छात्र बने।
कार्य: 'बुलैंट इंडस्ट्रीज' और समावेशी रोजगार
अमेरिका में करियर बनाने के बजाय, श्रीकांत भारत लौटे ताकि वे अपने जैसे अन्य लोगों के लिए काम कर सकें। उन्होंने Bollant Industries की स्थापना की, जो पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाती है।
समावेशी कार्यबल: उनकी कंपनी में 30-40% से अधिक कर्मचारी दिव्यांग हैं, जिन्हें समाज अक्सर 'बोझ' समझता है।
पर्यावरण संरक्षण: वे पुनर्नवीनीकरण (Recycled) कचरे से उत्पाद बनाकर 'ज्ञान से प्रकाश' के पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को साकार कर रहे हैं।
समाज पर प्रभाव और 'ज्ञान से प्रकाश' का दृष्टिकोण
श्रीकांत बोल्ला का जीवन हमारे मिशन "एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर" के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है:
कौशल आधारित शिक्षा: उन्होंने दिखाया कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि बाधाओं को तोड़ने का औजार है।
मानसिकता में बदलाव: उन्होंने समाज को यह सिखाया कि 'दिव्यांगता' शरीर में नहीं, सोच में होती है।
आर्थिक सशक्तिकरण: शिक्षित समाज वही है जहाँ हर व्यक्ति, अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद, सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमाने में सक्षम हो।
निष्कर्ष
श्रीकांत बोल्ला का जीवन एक जीवंत संदेश है कि जब ज्ञान का प्रकाश भीतर जलता है, तो बाहरी अंधकार का कोई महत्व नहीं रह जाता। आइए, हम भी अपनी बाधाओं को अवसरों में बदलें और एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ हर व्यक्ति की क्षमता का सम्मान हो।
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