आज के नायक: लक्ष्मण सिंह और 'चौका' प्रणाली की क्रांति || Gyan Se Prakash ज्ञान से प्रकाश - एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर

 


आज के नायक: लक्ष्मण सिंह और 'चौका' प्रणाली की क्रांति

जयपुर जिले के लापोड़िया गाँव के लक्ष्मण सिंह ने वह कर दिखाया जिसे आधुनिक इंजीनियरिंग भी मुश्किल मानती थी। उन्होंने अपनी पारंपरिक बुद्धि का उपयोग करके एक सूखे और बंजर गाँव को नखलिस्तान (Oasis) में बदल दिया।

७०० साल पुरानी परंपरा का पुनर्जन्म

जब लक्ष्मण सिंह युवा थे, तब उनके गाँव में भयंकर सूखा पड़ा था। खेती बर्बाद हो गई थी और लोग गाँव छोड़ रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि सरकार के भरोसे बैठने के बजाय खुद कुछ करना होगा। उन्होंने पुरानी जल संचयन विधियों का अध्ययन किया और 'चौका' (Chauka System) नामक एक अनोखी पद्धति विकसित की।

  • चौका प्रणाली क्या है? यह चौकोर गड्ढों का एक नेटवर्क है जो बारिश के पानी को बहने से रोकता है। पानी इन गड्ढों में रुकता है, जिससे वह धीरे-धीरे जमीन के अंदर जाकर जल स्तर को बढ़ाता है।

  • सामुदायिक श्रम: उन्होंने किसी मशीन का नहीं, बल्कि गाँव वालों के 'श्रमदान' का उपयोग किया। उन्होंने लोगों को समझाया कि गाँव की प्यास गाँव का हाथ ही बुझाएगा।

'ज्ञान से प्रकाश': एक जागरूक समाज का निर्माण

लक्ष्मण सिंह का कार्य 'एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर' होने के आपके विजन को इन ३ महत्वपूर्ण तरीकों से जोड़ता है:

१. पारंपरिक ज्ञान का सम्मान: उन्होंने साबित किया कि असली 'ज्ञान' वह है जो मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल हो। उन्होंने युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ना सिखाया। 

२. आत्मनिर्भरता (Self-Reliance): आज लापोड़िया के पास इतना पानी है कि भीषण गर्मी में भी उनके तालाब भरे रहते हैं और मवेशी कभी प्यासे नहीं मरते। गाँव अब पानी के लिए बाहरी मदद पर निर्भर नहीं है। 

३. ग्राम विकास समिति: उन्होंने हर गाँव में एक समिति बनाई जो पेड़ों, चरागाहों और जल स्रोतों की रक्षा करती है। यह एक अनुशासित और शिक्षित समाज की सबसे बड़ी जीत है।

निष्कर्ष: बूंद-बूंद से बदलाव

लक्ष्मण सिंह (जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है) हमें सिखाते हैं कि "ज्ञान" केवल डिग्री में नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान ढूँढने में है। जब एक गाँव जागरूक होता है, तो वह न केवल अपना पेट भरता है, बल्कि प्रकृति को भी समृद्ध करता है। यही 'ज्ञान से प्रकाश' का असली अर्थ है।

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