31-03-2026 || न किसी की बुराई, न किसी की वाह-वाही: क्या आज का युवा 'असली विवेक' खो रहा है ? || Gyan Se Prakash ज्ञान से प्रकाश - एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर

 



न किसी की बुराई, न किसी की वाह-वाही: क्या आज का युवा 'असली विवेक' खो रहा है?

आज के दौर में हम चौबीसों घंटे 'जजमेंट' (Judgment) की दुनिया में रहते हैं। इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए या दोस्तों से बात करते हुए, हमारा दिमाग बस दो ही काम करता है: या तो हम किसी की खूबियां (गुण) देखकर जलते/प्रभावित होते हैं, या किसी की कमियां (दोष) निकालकर उसे ट्रोल करते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह 'गुण-दोष' का चश्मा हमारी मानसिक शांति को कैसे छीन रहा है? ज्ञान से प्रकाश (Gyan Se Prakash) के इस विशेष संदेश में छिपा है खुशहाल जीवन का सबसे बड़ा सूत्र।

क्या है माया का खेल?

शास्त्रों में कहा गया है कि गुण और दोष, दोनों ही माया के कार्य हैं। जब हम किसी के गुणों पर फिदा होते हैं, तो मोह (Attachment) पैदा होता है, और जब दोष देखते हैं, तो द्वेष (Hatred) पैदा होता है। ये दोनों ही चीजें हमें हमारे असली लक्ष्य और मानसिक शांति से दूर ले जाती हैं।

"सुनहु तात मायाकृत गुन अरु दोष अनेक। गुन यह उभय न देखिअहिं देखिअ सो अबिबेक॥"

भगवान श्री राम कहते हैं कि गुण और दोष दोनों को ही न देखना 'विवेक' है, और इनमें उलझे रहना 'अविवेक' यानी अज्ञानता है।


आज के युवा को क्या सीखना चाहिए?

आज की पीढ़ी (Gen Z और Millennials) को इस प्राचीन ज्ञान से ये 3 बड़ी बातें सीखनी चाहिए:

  1. मेंटल फिल्टर (Mental Filter) बदलें: हम अक्सर दूसरों की 'Perfect' लाइफ देखकर खुद को छोटा महसूस करते हैं। यह 'गुण-दृष्टि' का जाल है। याद रखिए, जो दिख रहा है वो माया है। अपनी तुलना दूसरों से करना बंद करें।

  2. ट्रोलिंग और आलोचना से बचें: किसी की बुराई करना या दोष ढूंढना हमारे अपने मन में कड़वाहट भरता है। जब आप दोष देखना छोड़ देते हैं, तो आपका तनाव अपने आप कम होने लगता है।

  3. तटस्थता (Neutrality) का अभ्यास: युवा आज बहुत जल्दी 'React' करते हैं। विवेक का अर्थ है—चीजों को वैसे ही देखना जैसी वे हैं, बिना उन पर कोई ठप्पा (Tag) लगाए। न किसी की अति-प्रशंसा में बहें, न किसी की निंदा में समय गंवाएं।


एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर

ज्ञान से प्रकाश का उद्देश्य केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि आपको मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। असली शिक्षा वही है जो आपको इस द्वंद्व (Comparison) से मुक्त कर दे और आपको स्वयं के भीतर 'ईश्वर' या 'सत्य' को देखने की प्रेरणा दे।

निष्कर्ष: कल (31 मार्च) से एक संकल्प लें—न किसी का बुरा देखेंगे, न किसी का अच्छा ढूंढेंगे; बस अपना काम करेंगे और उस परम शक्ति पर ध्यान केंद्रित करेंगे जो हम सबके भीतर है। यही सबसे बड़ा विवेक है।

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