07-03-2026 || क्या आप जानते हैं ? अपनों और परायों में फर्क करना कब छोड़ देना चाहिए ? ✨ || Gyan Se Prakash ज्ञान से प्रकाश - एक शिक्षित समाज की ओर अग्रसर

 


अक्सर हम समाज की चकाचौंध और लोगों की 'स्टेटस' (status) देखकर तय करते हैं कि किससे दोस्ती करनी है और किससे नहीं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि असली भलाई किसमें है?

आज का विचार हमें जीवन का एक गहरा सत्य सिखाता है—"जिससे हमारा परम हित सधता हो, उसे समाज की दृष्टि से छोटा समझने की भूल कभी न करें।"

असली नीति क्या है ?

ग्रंथों और संतों का मत बिल्कुल स्पष्ट है। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है, जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, या जो मुश्किल समय में हमारा मार्गदर्शक बनता है—वही हमारा सबसे बड़ा शुभचिंतक है। फिर चाहे लोक-दृष्टि (दुनिया) उसे कैसा भी क्यों न समझे, हमारा कर्तव्य है कि हम उससे कपट छोड़कर प्रेम करें।

काकभुशुण्डि जी ने गरुड़ जी को एक बहुत सुंदर चौपाई के माध्यम से यही सीख दी है:

पन्नगारि असि नीति श्रुति सम्मत सज्जन कहहिं। अति नीचहु सन प्रीति करिअ जानि निज परम हित ॥

अर्थात्: हे गरुड़ जी! सज्जन पुरुष वेदों के अनुकूल यह नीति बताते हैं कि यदि किसी अति नीच व्यक्ति से भी अपना परम हित होता हो, तो उसे जानकर उससे भी प्रेम करना चाहिए।

आज का सबक

समाज क्या कहेगा, यह सोचने के बजाय यह सोचिए कि क्या वह व्यक्ति आपके जीवन में मूल्य (value) जोड़ रहा है? यदि हाँ, तो अहंकार और संकोच को त्याग कर उससे जुड़ना ही बुद्धिमानी है। सच्चा ज्ञान वही है जो हमें दिखावे से परे ले जाकर वास्तविकता से जोड़ दे।


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क्या आपको लगता है कि आजकल हम लोगों को परखने में गलती करते हैं ? कमेंट में अपने विचार जरूर साझा करें !


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