संस्कारों की कमी का परिणाम || the result of a lack of discipline || Sanskaron ki kami ka parinaam
संस्कारों की कमी का परिणाम || the result of a lack of discipline || Sanskaron ki kami ka parinaam संस्कारों की कमी का परिणाम || the result of a lack of discipline #GyanSePrakash #video #social
अकाल का अर्थ है, जब जिन चीजों की आवश्यकता होती है, वे उपलब्ध नहीं होतीं। जब अन्न की कमी होती है, तो शरीर को शक्ति और जीवन जीने के लिए आवश्यक तत्व नहीं मिलते। इससे मानव जीवन संकट में पड़ जाता है। लेकिन समाज में एक और प्रकार का अकाल होता है, जो अधिक खतरनाक होता है – संस्कारों का अकाल।
संस्कार हमसे मानवता की पहचान बनाते हैं। ये संस्कार, जिन्हें हम अपने पूर्वजों से सीखते हैं, हमें सही और गलत का भेद बताने के साथ-साथ आत्म-सम्मान और सम्मान की भावना भी प्रदान करते हैं। जब समाज में संस्कारों की कमी होती है, तो व्यक्ति स्वार्थी बनता जाता है। यह स्वार्थी व्यवहार पूरे समाज को प्रभावित करता है, जिससे मानवता का मूल तत्व गायब होने लगता है।
जब अन्न का अकाल होता है, तो लोग भूखे रहते हैं, लेकिन जब संस्कारों का अकाल होता है, तो लोग एक-दूसरे के प्रति संवेदनहीन हो जाते हैं। झगड़े, हिंसा और असामाजिक व्यवहार का उभरना इस बात का सूचक है कि समाज में संस्कारों की कमी है। जहां एक ओर भूख से तड़पते लोग जीवित रहने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं दूसरी ओर संस्कारों के बिना जीवित लोग आत्मीयता और मानवता के बिना जीते हैं।
समाज में संस्कारों की कमी का सीधा प्रभाव न केवल व्यक्तियों पर, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है। बच्चों को जब सही से संस्कार नहीं दिए जाते, तो वे बड़े होकर ऐसे नागरिक बनते हैं, जो न केवल अपने परिवार का, बल्कि समाज का भी हनन करते हैं। यह एक विषघातक चक्र है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है।
समाज को इस अकाल से बचाने के लिए हमें अपने कर्मों और विचारों में बदलाव लाना होगा। हमें न केवल भौतिक चीजों की चिंता करनी चाहिए, बल्कि हमारे संस्कार और मानवीय मूल्य भी महत्वपूर्ण हैं। केवल तभी हम एक सशक्त और सजीव समाज की कल्पना कर सकते हैं।
इस संदर्भ में हमें यह समझना होगा कि मानवता केवल खाने-पीने की चीजों से नहीं, बल्कि संस्कारों से भी बनती है। अगर संस्कारों का अकाल पड़ा, तो ना केवल मानवता, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और समाज का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम सभी एक साथ मिलकर संस्कारों की पुनर्स्थापना करें और समाज को बेहतर बनाएँ।
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