बिरसा मुंडा: जल, जंगल और जमीन के रक्षक 'धरती आबा' प्रस्तावना: "हमारा देश, हमारा राज!" यह उद्घोष था उस युवा का जिसने केवल 25 वर्ष की आयु में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। बिरसा मुंडा केवल एक आदिवासी नेता नहीं थे, बल्कि वे एक महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि अपनी संस्कृति की रक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए उम्र नहीं, बल्कि फौलादी हौसला चाहिए। बचपन और शिक्षा: ज्ञान की खोज 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गाँव में जन्मे बिरसा मुंडा बचपन से ही बहुत मेधावी थे। उनके शिक्षक जयपाल नाग ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित किया। बिरसा ने जर्मन मिशन स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने पश्चिमी शिक्षा के साथ-साथ अपनी जनजातीय संस्कृति की जड़ों को भी गहराई से समझा। यही वह समय था जब उन्होंने महसूस किया कि शिक्षा ही वह हथियार है जिससे समाज की बेड़ियों को तोड़ा जा सकता है। 'उलगुलान' और सामाजिक सुधार बिरसा मुंडा ने देखा कि उनके समाज में अज्ञानता और अंधविश्वास फैला हुआ था। उन्होंने ल...
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